नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सात बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर राज्यसभा सभापति के समक्ष औपचारिक याचिका दायर की है।
संजय सिंह ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत इन सांसदों की सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक विशेषज्ञ कपिल सिब्बल सहित कई विशेषज्ञों ने भी यही राय दी है कि ऐसे मामलों में सदस्यता समाप्त होना तय है।
उन्होंने यह याचिका देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को भेजते हुए आग्रह किया है कि इस मामले की जल्द सुनवाई कर न्यायपूर्ण फैसला लिया जाए।
“जनादेश और संविधान के साथ विश्वासघात”
संजय सिंह ने कहा कि किसी पार्टी के टिकट पर चुने जाने के बाद दूसरी पार्टी में जाना लोकतंत्र और जनता के जनादेश के साथ धोखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के कदम अक्सर जांच एजेंसियों के दबाव में उठाए जाते हैं और यह संविधान की भावना के खिलाफ है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी सांसद को अपनी पार्टी से मतभेद है, तो उसे पहले इस्तीफा देकर जनता के बीच जाकर नया जनादेश लेना चाहिए।
कानूनी लड़ाई की तैयारी
संजय सिंह ने कहा कि इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले पहले से मौजूद हैं, जो स्पष्ट करते हैं कि दल-बदल की स्थिति में सदस्यता समाप्त हो सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि कानून के तहत उचित कार्रवाई होगी, भले ही प्रक्रिया में समय लगे।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
अन्य दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और संभावित और दलबदल की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने इसे “झूठा प्रचार” बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब में जनता ऐसे नेताओं के खिलाफ है जिन्होंने पार्टी छोड़ी है।
संजय सिंह ने यह भी चेतावनी दी कि झूठे आरोप और फर्जी तस्वीरें फैलाने वालों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शिता की चुनौती
उन्होंने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि सभी नेता अपने घर जनता के लिए खोलें, जिससे सच्चाई सामने आ सके और आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सके।
यह मामला अब राजनीतिक के साथ-साथ संवैधानिक और कानूनी लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में अहम फैसला हो सकता है।

