नई दिल्ली: पिछली रात रिकॉर्ड किया गया एक छोटा संदेश शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की वैकल्पिक नेतृत्व योजना बनकर सामने आया। दिल्ली पहुंचने पर संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने के बाद पार्टी ने कहा कि तीनों के हिरासत में रहने तक संगठन प्रभारी अजींक्य शिंदे जंतर-मंतर के प्रस्तावित प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।
10 अक्टूबर को मुंबई से दिल्ली पहुंचे इन नेताओं के विमान में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दिल्ली पुलिस के कर्मी दाखिल हुए। सुबह 10:53 बजे जारी एक्स पोस्ट में CJP ने तीनों को विमान के भीतर से हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी और मौके का वीडियो साझा किया।
View CJP’s original post — October 10, 2026
जंतर-मंतर की यात्रा विमान के भीतर रुकी
लगभग दो मिनट 21 सेकंड का वीडियो विमान के संकरे गलियारे का दृश्य दिखाता है। सीटों के बीच लोग खड़े हैं, कुछ यात्री फोन से रिकॉर्डिंग कर रहे हैं और वर्दीधारी पुलिसकर्मी गलियारे में नजर आते हैं। वीडियो के बाद के हिस्से में नीला बैकपैक पहने एक व्यक्ति के पास महिला पुलिसकर्मी दिखाई देती हैं।


पहले से रिकॉर्ड संदेश में शिंदे को जिम्मेदारी
दोपहर 12:59 बजे अंतिम बार संपादित दूसरे पोस्ट में CJP ने बताया कि संभावित गिरफ्तारी की आशंका में दीपके ने शुक्रवार रात यह संदेश रिकॉर्ड किया था। पार्टी के अनुसार, दीपके और उनके दोनों साथियों की गैरमौजूदगी में शिंदे जंतर-मंतर के प्रदर्शन की कमान संभालेंगे।
View CJP’s original post — October 10, 2026
रिकॉर्ड संदेश में दीपके समर्थकों से सीधे मुखातिब होते हैं। वह कहते हैं कि यदि लोग यह वीडियो देख रहे हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें और उनके दोनों साथियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वह समर्थकों से शिंदे को फॉलो करने और उनके नेतृत्व में आंदोलन आगे बढ़ाने की अपील करते हैं। पार्टी का पोस्ट इसे हिरासत की अवधि के लिए की गई व्यवस्था बताता है, स्थायी नेतृत्व परिवर्तन नहीं।
दीपके पहले से रिकॉर्ड अपील में “गिरफ्तार” शब्द इस्तेमाल करते हैं, जबकि CJP के साथ जारी पोस्ट घटना को हिरासत बताते हैं। इन दोनों पोस्ट में औपचारिक गिरफ्तारी के दस्तावेज, आरोपों का विवरण या बाद में रिहाई की जानकारी नहीं दी गई है।
पिछला घटनाक्रम: अनुमति क्यों नहीं मिली थी
प्रस्तावित प्रदर्शन मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए था। ये प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं; चुनाव आयोग राजनीतिक उद्देश्य से मतदाता सूची में हेरफेर के दावों को खारिज कर चुका है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 9 अक्टूबर को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस के पत्र के अनुसार, आयोजकों की 7 अक्टूबर की सूचना निर्धारित 10 दिन पहले आवेदन करने की शर्त पूरी नहीं करती थी। पुलिस ने पूर्व अनुमति की शर्तों के कथित उल्लंघन और कानून-व्यवस्था, यातायात तथा दूसरे नागरिकों की सुरक्षा की चिंताओं का भी उल्लेख किया था।
मेट्रो और रेल सेवाओं पर प्रतिबंधों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही अलग विषय थी; उससे इस प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिली थी।

