नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिल्ली के अनुरोध पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दी है। नोटिसों, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा अलग से 30 नवंबर, 2026 तक बढ़ाई गई है।
ये फैसले 26 सितंबर को दोपहर 3 बजे हुई आयोग की बैठक में लिए गए। बैठक में SIR के तहत नोटिस प्राप्त करने वाले कुछ निर्धारित श्रेणियों के मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र करने की व्यवस्था भी मंजूर की गई, जिससे उन्हें सुनवाई के लिए निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के कार्यालय जाने की आवश्यकता कम होगी।
दिल्ली के लिए घोषित दोनों समयसीमाएं पुनरीक्षण प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से संबंधित हैं। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर है, जबकि अधिकारियों को नोटिसों, दावों और आपत्तियों का निपटारा 30 नवंबर तक पूरा करना होगा। नवंबर की समयसीमा का अर्थ दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ना नहीं है।
दिल्ली की समयसीमा बढ़ाने के साथ ही आयोग ने जारी SIR के दौरान ऐसे लोगों को दिए गए नोटिसों के निपटारे की प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की है, जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी है या जिनके रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां हैं।
बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) ऐसे नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं के घर जाएंगे, उनके दस्तावेज एकत्र करेंगे और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के निर्णय के लिए उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे।
इस व्यवस्था के दायरे में आने वाले लोगों को सामान्यतः सुनवाई के लिए ERO या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) के कार्यालय बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। आयोग ने कहा कि ERO द्वारा तय किए गए अपवादस्वरूप मामलों में ही सुनवाई होगी और उसे भी प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन किया जाना चाहिए।
सुनवाई आवश्यक होने पर मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से उपस्थित होने के लिए अधिकृत कर सकता है। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाएं मजबूत करने का भी निर्देश दिया है।
इस व्यवस्था में दस्तावेज एकत्र करने और निर्णय लेने की जिम्मेदारियां अलग रहेंगी। BLO दस्तावेज एकत्र कर उन्हें अपलोड करेंगे, जबकि संबंधित मामले पर निर्णय ERO लेंगे।
जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को स्थानीय जरूरतों के अनुसार पर्याप्त संख्या में सहायता केंद्र स्थापित करने और विशेष शिविर आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है। ये सुविधाएं रैन बसेरों में रहने वालों, श्रमिकों, गरीबों, बेघर लोगों तथा सहायता की आवश्यकता वाले अन्य लोगों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी।
आयोग ने SIR के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची से छूट गए लोगों के साथ-साथ युवाओं और पहली बार मतदाता बनने वालों के पंजीकरण के लिए तत्काल विशेष अभियान शुरू करने का अलग से निर्देश दिया है।
आयोग के अनुसार, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पहले ही पूरा हो चुका है। इस प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद जिसका नाम मतदाता सूची में छूट गया हो, वह निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकता है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को ऐसे आवेदनों में सहायता करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने कहा कि CEO, DEO और ERO इन मतदाताओं के पंजीकरण के लिए तत्काल विशेष अभियान शुरू करेंगे।
छूटे हुए मतदाताओं की सहायता के उदाहरण के रूप में बयान में गोवा का उल्लेख किया गया है। वहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने BLO को घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र करने का निर्देश दिया है। बयान में उल्लिखित 97 मतदाताओं में से 81 ने नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 भर दिया है। यह संख्या फॉर्म जमा करने से संबंधित है, न कि इस बात की पुष्टि कि सभी आवेदकों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो चुके हैं।
आयोग ने SIR के दौरान फॉर्म 6 के साथ संलग्न घोषणापत्र पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उसने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस घोषणापत्र को बरकरार रखा है। SIR के अतिरिक्त अन्य अवधियों में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे।
दिल्ली के साथ ही महाराष्ट्र में भी वहां के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर समयसीमाओं में अलग से बदलाव किया गया है।
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ाई गई है। नोटिसों, दावों और आपत्तियों के निपटारे की अवधि 10 नवंबर, 2026 तक बढ़ाई गई है। ये तारीखें दिल्ली के लिए घोषित 30 अक्टूबर और 30 नवंबर की समयसीमाओं से अलग हैं।
बैठक का एक अन्य फैसला ECINet की विशेषज्ञ की सहायता से समीक्षा करने से संबंधित है। इसी प्रणाली पर BLO, SIR नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं से एकत्र किए गए दस्तावेज अपलोड करेंगे।
वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति ECINet की समीक्षा करेगी। इसमें किसी IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। समिति दोबारा जांच करेगी कि प्रणाली संबंधित अधिनियमों और नियमों के अनुरूप है या नहीं तथा अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।
आयोग ने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकारों के अनुसार ECINet में भूमिका-आधारित पहुंच दी गई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पिछले कुछ महीनों में पोर्टल में कई सुधार किए जा चुके हैं।
क्षेत्रीय अधिकारियों को कामकाज में किसी अतिरिक्त लचीलेपन की आवश्यकता होगी तो उसकी व्यवस्था भी लागू की जाएगी। आगे से सूचना प्रौद्योगिकी मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी सभी नई पहलों को आयोग की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने से पहले अधिकारियों की समिति (COO) में चर्चा के लिए रखा जाएगा।
बयान में कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र और आयोग के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में जिम्मेदारियों के बंटवारे पर भी स्पष्टीकरण दिया गया है।
आयोग के अनुसार, यह पत्र चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। इसका आयोग या उसके सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के किसी नीतिगत मामले से संबंध नहीं था।
आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्यों के पुनर्वितरण के आदेश, दोनों निर्वाचन आयुक्तों के आदेशों के बाद लागू नहीं किए गए थे। बयान के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग पर उप निर्वाचन आयुक्त की निगरानी की जिम्मेदारी कभी वापस नहीं ली गई थी।
आयोग ने दोहराया कि SIR कराने के फैसलों को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी।
उसने कहा कि बिहार से शुरू होकर पश्चिम बंगाल और अन्य 30 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में SIR कराने के लिए 24 जून, 2025 को जारी आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। आयोग के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को इस आदेश को बरकरार रखा।
आयोग ने यह भी कहा कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर, 2025 को जारी SIR कार्यक्रम तथा 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 14 मई, 2026 को जारी कार्यक्रम को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी।
आयोग के मुताबिक, तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की अंतिम संख्या सामने आएगी।
बैठक में आयोग के आंतरिक प्रशासन से संबंधित निर्देश भी मंजूर किए गए। आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और बैठकों के कार्यवृत्त जारी किए जाएंगे।
सभी अधिकारियों की वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर की निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करनी होगी। अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी लेना आवश्यक होगा।
बयान में कहा गया कि निर्वाचन आयुक्तों की ओर से आयोग के अधिकारियों को दिए गए सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।

