रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में ED ने दाखिल की पूरक PMLA शिकायत, अपराध की आय ₹40,185.55 करोड़ आंकी

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नई दिल्ली, 9 अगस्त: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विशेष अदालत के समक्ष पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। एजेंसी ने इस मामले में अपराध की आय (Proceeds of Crime) ₹40,185.55 करोड़ आंकी है।

ED की 9 अगस्त की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूरक अभियोजन शिकायत 8 अगस्त को PMLA, 2002 के तहत नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू जिला अदालतों की विशेष अदालत (PMLA) के समक्ष दाखिल की गई।

यह पूरक शिकायत ECIR/STF/26/2025 और PMLA विशेष मामला संख्या 20/2026 में 27 मार्च 2026 को दाखिल पहली अभियोजन शिकायत की निरंतरता में दायर की गई है। ED के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM), रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL), गौतम भैलाल दोशी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को PMLA की धारा 3 तथा धारा 70 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 3 के तहत अपराधों के लिए आरोपी बनाया गया है, जो अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय हैं।

ED ने कहा कि उसने CBI की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच, नई दिल्ली द्वारा बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों पर दर्ज कई FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। एजेंसी के मुताबिक, अनुसूचित अपराध RCOM, RTL और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड द्वारा फंड-आधारित और गैर-फंड-आधारित ऋण सुविधाओं को कथित रूप से धोखाधड़ी से प्राप्त करने और उनका धन दूसरी ओर मोड़ने से संबंधित हैं। जांच में कई परस्पर जुड़े लेनदेन शामिल हैं।

ED ने आरोप लगाया कि नई ऋण सुविधाओं का बार-बार उनके स्वीकृत उद्देश्य के बजाय पुराने घरेलू और विदेशी दायित्वों को चुकाने, घुमाने और एवरग्रीन करने के लिए धोखाधड़ी से इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के अनुसार, धन को समूह कंपनियों, विशेष रूप से बनाई गई माध्यम संस्थाओं, कई बैंक खातों और लिक्विड म्यूचुअल फंड के जरिये लेयर किया गया।

ED के मुताबिक, धन का कथित तौर पर पुराने External Commercial Borrowings और Foreign Currency Convertible Bonds (FCCBs) की देनदारियों को चुकाने के लिए भी इस्तेमाल किया गया और उसे वैध कारोबारी खर्च या प्राप्तियों के रूप में पेश किया गया।

एजेंसी ने कहा कि उसकी जांच में यह भी सामने आया कि कथित धोखाधड़ी की यह व्यवस्था कम से कम 2007 तक शुरू हो चुकी थी और उसके बाद एक जुड़ी हुई तथा लगातार जारी आपराधिक गतिविधि के रूप में चलती रही। ED ने आरोप लगाया कि ऋण की रकम रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड सहित समूह की कंपनियों की ओर मोड़ी गई।

एजेंसी ने आगे आरोप लगाया कि धन को भारत के बाहर प्रमोटरों के लिए निजी संपत्तियां खरीदने में भी लगाया गया और RCOM के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

ED ने अपराध की आय ₹40,185.55 करोड़ आंकी है। एजेंसी के अनुसार, यह उधारकर्ता संस्थाओं द्वारा कंसोर्टियम बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डधारकों को चुकाई न गई कुल बकाया राशि है।

एजेंसी ने कहा कि जांच में धन जुटाने, उसके इस्तेमाल, उसे छिपाने और उसे वैध रूप में पेश करने में आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं सामने आई हैं। इसमें US$1 बिलियन के FCCB से प्राप्त धन के अंतिम उपयोग को लेकर कथित गलत प्रमाणन भी शामिल है।

ED ने कहा कि उसने ₹8,078.06 करोड़ मूल्य की उन संपत्तियों को जब्त करने का अनुरोध किया है, जिन्हें पहले अटैच किया गया था और जिनकी अटैचमेंट की पुष्टि निर्णायक प्राधिकरण ने की है। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में लीजहोल्ड तथा अचल संपत्तियां शामिल हैं।

इसी ECIR में गौतम भैलाल दोशी को 12 जून 2026 को और सतीश सेठ को 9 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। ED के अनुसार, दोनों न्यायिक हिरासत में हैं।

विशेष अदालत (PMLA) ने इस मामले में मुख्य अभियोजन शिकायत का 15 जून 2026 को संज्ञान लिया था। ED ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है।

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