नई दिल्ली, 3 जून: मालवीय नगर के हौज रानी स्थित लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग के दौरान जहां चारों ओर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल था, वहीं कुछ लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मानवता और साहस की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
पांच स्थानीय नागरिकों — अफजल, मोहम्मद शाहरुख, मोहम्मद अनीश, मोहम्मद आमिर और मोहम्मद वसीम — तथा दिल्ली पुलिस के पांच जांबाज पुलिसकर्मियों — हेड कांस्टेबल दिनेश, हेड कांस्टेबल करतार सिंह, हेड कांस्टेबल देशराज, हेड कांस्टेबल अजय और हेड कांस्टेबल मीना — ने आग में फंसे लोगों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग तेजी से फैल रही थी और कई लोग अंदर फंसे हुए थे। ऐसे में इन नागरिकों और पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। घने धुएं और खतरनाक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को बाहर निकालने के बाद उन्हें प्राथमिक सहायता भी दी गई। कुछ पीड़ितों की सांसें रुकने जैसी स्थिति होने पर इन बहादुर लोगों ने मौके पर ही सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देकर उनकी जान बचाने का प्रयास किया, जिससे कई लोगों को समय रहते चिकित्सा सहायता मिल सकी।
विशेष बात यह रही कि बचाव कार्य के दौरान इनमें से कई लोग स्वयं भी घायल हो गए, लेकिन उन्होंने दूसरों की मदद करना नहीं छोड़ा। अपनी चोटों और खतरे की परवाह किए बिना वे लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे रहे।
मालवीय नगर अग्निकांड ने जहां कई परिवारों को गहरा दुख दिया है, वहीं इन नागरिकों और पुलिसकर्मियों का साहस यह दिखाता है कि संकट की घड़ी में मानवता सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है।
जब लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब इन दस लोगों ने आगे बढ़कर दूसरों की जिंदगी बचाने का फैसला किया। उनकी बहादुरी, निस्वार्थ सेवा और मानवता के प्रति समर्पण आज पूरे शहर के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
दिल्ली इस दुखद घटना के पीड़ितों को याद कर रही है, वहीं इन दस जांबाजों के साहस और सेवा भावना को भी सलाम कर रही है, जिन्होंने संकट की घड़ी में सच्चे नायकों की भूमिका निभाई।

