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शालीमार बाग में विश्वस्तरीय ऑडिटोरियम और सामुदायिक केंद्र का निर्माण करेगा एमसीडी, एनबीसीसी के साथ हुआ समझौता

नई दिल्ली, 29 मई: राष्ट्रीय राजधानी में नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र में विश्वस्तरीय ऑडिटोरियम एवं सामुदायिक केंद्र के निर्माण के लिए एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह परियोजना मुख्यमंत्री विकास निधि के अंतर्गत विकसित की जाएगी। 29 मई को हुए इस समझौते पर एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार तथा एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. के.पी. महादेवस्वामी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य एक आधुनिक, समावेशी और बहुउद्देशीय सार्वजनिक परिसर विकसित करना है, जिसमें सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

परियोजना के प्रमुख आकर्षण के रूप में लगभग 1,000 लोगों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। यह ऑडिटोरियम सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सार्वजनिक आयोजनों, सेमिनारों, सरकारी समारोहों, शैक्षणिक गतिविधियों तथा सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, परिसर में लगभग 100-100 लोगों की क्षमता वाले दो आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल भी बनाए जाएंगे। इनका उपयोग बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, जनसंवाद और विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा।

एमसीडी अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना दिल्ली में नागरिक सुविधाओं के विस्तार और सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में निगम की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

देशभर में कई प्रतिष्ठित अवसंरचना परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी इस परियोजना को क्रियान्वित करेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे निर्माण गुणवत्ता, समयबद्ध कार्यान्वयन और आधुनिक वास्तुशिल्प मानकों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

शालीमार बाग और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह ऑडिटोरियम एवं सामुदायिक केंद्र एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरेगा। इससे शैक्षणिक संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, सांस्कृतिक संगठनों, सामाजिक समूहों और सरकारी विभागों को विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों के आयोजन के लिए एक आधुनिक एवं सुव्यवस्थित मंच उपलब्ध होगा।

अधिकारियों ने कहा कि यह परियोजना न केवल क्षेत्र में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाले वर्षों में सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक केंद्र के रूप में भी स्थापित होगी।

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