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यूनिवर्सल बायोफ्यूल्स मामले में RBI ने FEMA कार्यवाही समाप्त की; ₹29.81 लाख जमा कर हुआ निपटारा

नई दिल्ली, 9 जून: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA), 1999 की धारा 15 के तहत यूनिवर्सल बायोफ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड के मामले में एक कंपाउंडिंग आदेश जारी किया है। इस आदेश के साथ कंपनी के खिलाफ चल रही FEMA कार्यवाही समाप्त हो गई है।

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कंपाउंडिंग आदेश प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी किए गए “नो ऑब्जेक्शन” (NOC) के बाद पारित किया गया। इसके परिणामस्वरूप कंपनी के खिलाफ FEMA उल्लंघन से संबंधित लंबित कार्यवाही का निपटारा हो गया।

मामले की जांच ईडी ने प्राप्त विश्वसनीय जानकारी के आधार पर FEMA के प्रावधानों के तहत शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद ईडी ने फेमा की धारा 16 के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।

यूनिवर्सल बायोफ्यूल्स मामले में RBI ने FEMA कार्यवाही समाप्त की; ₹29.81 लाख जमा कर हुआ निपटारा
यूनिवर्सल बायोफ्यूल्स मामले में RBI ने FEMA कार्यवाही समाप्त की; ₹29.81 लाख जमा कर हुआ निपटारा

जांच में पाया गया कि कंपनी ने अग्रिम भुगतान प्राप्त करने के बाद एक वर्ष के भीतर निर्यात पूरा नहीं किया, जो फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (एक्सपोर्ट ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज) रेगुलेशंस, 2000 के रेगुलेशन 16(1)(i) का उल्लंघन माना गया। यह कथित उल्लंघन लगभग ₹39.07 करोड़ की राशि से संबंधित था।

इसके बाद यूनिवर्सल बायोफ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड ने FEMA की धारा 15 के तहत उल्लंघन के कंपाउंडिंग (निपटारे) के लिए RBI के समक्ष आवेदन किया। RBI ने मामले पर निर्णय लेने से पहले प्रवर्तन निदेशालय से राय मांगी।

ईडी ने अपने जवाब में कहा कि कानून की भावना और प्रावधानों के अनुरूप इस मामले में कंपाउंडिंग किए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद RBI ने 18 मार्च 2026 को कंपाउंडिंग आदेश जारी किया।

आदेश के तहत कंपनी ने ₹29.81 लाख की एकमुश्त कंपाउंडिंग राशि जमा की, जिसके बाद FEMA के तहत चल रही न्यायिक और प्रशासनिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि कंपाउंडिंग आदेश के बाद संबंधित उल्लंघन को लेकर कंपनी के खिलाफ आगे की FEMA कार्यवाही और मुकदमेबाजी समाप्त मानी जाएगी।

यह मामला दर्शाता है कि FEMA के तहत कुछ नियामकीय उल्लंघनों का निपटारा निर्धारित राशि के भुगतान और सक्षम प्राधिकारियों की मंजूरी के माध्यम से किया जा सकता है, जिससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सके।

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